अजीत डोवाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार :एनएसए: नियुक्त

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अजित डोभालमंथन. नयी दिल्ली. कई सम्मान पा चुके खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख 69 वर्षीय पुलिस अधिकारी अजीत डोवाल को आज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार :एनएसए: नियुक्त किया गया, वे शिवशंकर मेनन की जगह लेंगे. अजीत डोवाल के नाम को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति :एसीसी: ने मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पदभार संभालने के बाद दूसरी बड़ी नियुक्ति के तहत 69 वर्षीय डोवाल को यह पद सौंपा गया। वह राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुददों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सहयोग करेंगे। इससे पहले नपेंद्र मिश्र को मोदी का प्रधान सचिव बनाया गया था।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, जनवरी 2005 में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त डोवाल की नियुक्ति आज हुई। आदेश में कहा गया कि उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री के कार्यकाल तक या अगले आदेश तक, जो पहले हो, लागू रहेगी।
मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले से डोवाल को इस पद की जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा शुरू हो गई थीं। डोवाल ने गुजरात भवन में मोदी से मुलाकात की थी और देश के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों से उन्हें अवगत कराया।
20 जनवरी 1945 को जन्मे सेन्य अधिकारी के पुत्र, राष्ट्रिय सेनिक स्कूल अजमेर तथा डिफेंस कालेज में पड़े , सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित होने वाले पहले पुलिस अधिकारी अजित डोवाल देश के भीतर और बाहर से मौजूद खतरों के बारे में अपने गहरे नजरिये को उपलब्ध कराएंगे।
वर्ष 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी डोवाल वर्ष 1999 में कंधार ले जाए गए इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी 814 के अपहरणकर्ताओं के साथ मुख्य वार्ताकार थे। कुछ वर्ष वर्दी में बिताने के बाद, डोवाल ने 33 वर्ष से अधिक समय खुफिया अधिकारी के तौर पर बिताया और इस दौरान वह पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे।
डोवाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की आपरेशन शाखा का नेतृत्व किया। सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद, वे दिल्ली स्थित एनजीओ विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन चला रहे थे, जो वार्ता और विवाद निबटारे के लिए मंच उपलब्ध कराता है।
भारतीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर स्पष्ट नजरिया रखने वाले डोवाल ने भारतीय सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा बलों के बीच करीबी सहयोग बढाने के लिए देश विदेश में विस्तृत रूप से अपनी बात रखी। वह सेवा में केवल छह वर्ष में बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित होने वाले पहले पुलिस अधिकारी हैं। यह सम्मान आमतौर पर 15 वर्ष बाद दिया जाता है।
डोवाल मिजोरम में उग्रवाद निरोधक अभियान चलाकर इसके सात में से छह कमांडरों को अपने पक्ष में कर मिजो उग्रवादी नेता लालदेंगा को वार्ता की मेज पर लेकर आए। वर्ष 1989 में उन्होंने अमतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों का सफाया करने के लिए आपरेशन ब्लैक थंडर के तह पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के दल का नेतृत्व किया था।
डोवाल ने वर्ष 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किये गये रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाई थी। कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान, डोवाल आतंकवादी समूहों को तोड़ने में सफल रहे।
अजीत डोवाल कीर्तिमान धारी ख़ुफ़िया अधिकारी ही नहीं देश की राजनेतिक नब्ज पर पकड़ भी बहुत गहरी
डोवाल जनवरी 2005 में खुफिया विभाग के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे क्योंकि संप्रग सरकार ने इस पद के लिए दो साल का कार्यकाल करने की व्यवस्था में देरी की थी। नयी सरकार के गठन के साथ ही इस बात के कयास लगाये जा रहे थे कि अजीत डोवाल ही नये राष्ट्रीय सुलाहकार होंगे लेकिन उनके नाम पर सत्ता के गलियारे में ही कुछ लोगों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराई जा रही थी जिसके कारण उनके नाम पर निर्णय नहीं हो पा रहा था। लेकिन आखिरकार सारी लॉबिंग और आपत्तियां दरकिनार करते हुए मोदी सरकार ने अपने लिए नया राष्ट्रीय सलाहकार चुन लिया है। श्री डोवाल इस सरकार के कार्यकाल या फिर अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे।
केरल कैडर के आईपीएस अजीत डोवाल 2005 में आईबी चीफ से रिटायर होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संचालित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउण्डेशन ज्वाइन कर लिया। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउण्डेशन का दिल्ली के मंहगे राजनयिक रहवास क्षेत्र चाणक्यपुरी इलाके में आलीशान दफ्तर है और संघ की पहल पर यहां राष्ट्रवादी देश हित के कई महत्पूर्ण मुद्दों पर शोध और विमर्श किया जाता है। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउण्डेशन से कई नामी गिरामी दिग्गज जुड़े हुए हैं। श्री डोवाल बीते सात आठ सालों से इसी संस्था का बखूबी संचालन कर रहे थे और देश को राष्ट्र हित के मुद्दों पर अभियान की प्रेरणा दे रहे थे।
देश में काले धन के खिलाफ बाबा रामदेव ने मुहिम का मूल मार्गदर्शन विवेकानंद इंटरनेशनल फाउण्डेशन से ही प्राप्त किया था. खुद बाबा रामदेव ने कई बार विवेकानंद केन्द्र में श्री डोवाल से मीटिंग की थी। समझा जाता है कि कालेधन पर इस मुहिम की मॉनिटरिंग खुद अजीत डोवाल ही कर रहे थे। जाहिर है, अपने बीते करीब दशक भर के काम काज के कारण अजीत डोवाल संघ के काफी करीब हैं और नयी सरकार बनने के साथ ही यह लगभग तय हो गया था कि वे ही नये राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त होंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति चाहते हैं जो सुरक्षा के साथ साथ विदेश नीति का भी जानकार हो जिसमे अजीत डोवाल की असाधारण कूटनीतिक योग्यता के सामने कोई टिक नहीं सका. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ ही दो सह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की नियुक्ति भी होनी है, जिसमें एक पद के लिए हरदीप पुरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हरदीप पुरी यूएन में भारत के स्थाई प्रतिनिधि के बतौर लंबे समय तक काम कर चुके हैं और इसी साल जनवरी में उन्होंने भाजपा भी ज्वाइन कर ली।

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