मोदी के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी GDP-नोटबंदी पर सरकार की आलोचना की

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पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने एक तरह से पिछले दिनों नीति आयोग द्वारा जारी जीडीपी के आंकड़ों को लेकर सरकार पर सवाल दाग दिया है. उन्होंने इशारों-इशारों में नोटबंदी के असर पर भी शक जताया है. दरअसल, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने संशोधित वृद्धि दर के आंकड़ों पर विवाद के बीच इसकी समीक्षा विशेषज्ञों से कराने की वकालत की है. उन्होंने कहा है कि संदेह दूर करने और भरोसा कायम करने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि आंकड़ों को लेकर बनी ‘पहेली’ पर भी चीजें साफ की जानी चाहिए.
नीति आयोग की ओर इशारा करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि ऐसे संस्थान जिनके पास सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना की विशेषज्ञता नहीं है, उनको इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए. सुब्रमण्यम ने हाल में अपनी नई किताब ‘ऑफ काउंसिल: द चैलेंजेस ऑफ द मोदी जेटली इकनॉमी’ में नोटबंदी की आलोचना की है. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में उनसे सलाह ली गई थी, तो उन्होंने इसका कोई साफ जबाब नहीं दिया.
सुब्रमण्यम ने साक्षात्कार में कहा, ‘एक अर्थशास्त्री के रूप में मेरा मानना है कि जीडीपी श्रृंखला की नवनिर्धारित पिछली कड़ियों कुछ पहेली जरूर है जिन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए. चूंकि कुछ चीजों को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है. ऐसे में भरोसा कायम करने और किसी तरह के संदेह को दूर करने के लिए मुझे लगता है कि विशेषज्ञों को इसकी गहन जांच करनी चाहिए और अपना जवाब देना चाहिए.’
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा पिछले महीने जीडीपी की पिछली श्रृंखला के आंकड़ों के दौरान नीति आयोग की मौजूदगी को लेकर पैदा हुए विवाद पर सुब्रमण्यम ने कहा कि आंकड़े बनाने और उनपर चीजें स्पष्ट करने की मुख्य जिम्मेदारी विशेषज्ञों की है. मुझे लगता है कि जीडीपी की गणना काफी तकनीकी काम है और तकनीकी विशेषज्ञों को ही यह काम करना चाहिए. ऐसे संस्थान जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता नहीं हैं उन्हें इससे दूर रखा जाना चाहिए

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