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नईदिल्लीआतंकियों से दोस्ती में हुआ था बर्खास्त, फिर बना रहा प्रोफेसर, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की करतूत से उठे कई सवाल
लाल किला धमाके के बाद अल-फलाह विश्वविद्यालय जांच के घेरे में आ गया है. प्रोफेसर निसार-उल-हसन समेत तीन डॉक्टर गिरफ्तार किए गए हैं. जैश-ए-मोहम्मद से लिंक सांमने आया है. सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलवामा का डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी अल-फलाह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर था. ऐसा संदेह है कि विस्फोटकों से लदी हुंदै आई20 वही चला रहा था.

लाल किला के पास हुए धमाके के सिलसिले में तीन डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद का अल-फलाह विश्वविद्यालय जांच के घेरे में आ गया है. आतंकी गतिविधियों से जुड़े प्रोफेसर की नियुक्ति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. डॉ. मुजम्मिल गनई के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी का एक और प्रोफेसर डॉ. निसार-उल-हसन जांच के घेरे में आ गया है. वर्ष 2023 में उसे आतंकवादियों से लिंक के आरोपों के चलते सेवा से बर्खास्त किया गया था. लेकिन बर्खास्तगी के बाद भी डॉ. निसार-उल-हसन अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत रहा, जिससे विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल उठते हैं. विश्वविद्यालय में या तो बैकग्राउंड चेक की व्यवस्था नहीं है, या फिर जानबूझकर उसे नजरअंदाज़ किया जाता है.
पढ़े-लिखे लोगों के ‘पाकिस्तान समर्थित सरपरस्तों के इशारे पर काम करते’ हुए पाए जाने के बाद जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि यह विश्वविद्यालय ऐसे व्यक्तियों के लिए आश्रय स्थल कैसे बन गया. विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार, इसकी स्थापना हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत की गई थी. इसकी शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी. 2013 में अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से ‘ए’ श्रेणी की मान्यता प्राप्त हुई. 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया. अल-फलाह मेडिकल कॉलेज भी इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध है.
अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट करता है यूनिवर्सिटी का संचालन
कई विशेषज्ञों के अनुसार, अपने प्रारंभिक वर्षों में अल-फलाह विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के एक उत्कृष्ट विकल्प के रूप में सामने आया. दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से केवल 30 किलोमीटर दूर स्थित इस विश्वविद्यालय का प्रबंधन अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी. ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी हैं. उपाध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्ला कासिमी एम ए और सचिव मोहम्मद वाजिद डीएमई हैं.
विश्वविद्यालय में 650 बिस्तरों वाला एक अस्पताल
अल-फलाह विश्वविद्यालय के वर्तमान रजिस्ट्रार प्रोफेसर (डॉ.) मोहम्मद परवेज हैं. डॉ. भूपिंदर कौर आनंद इसकी कुलपति हैं. यह विश्वविद्यालय तीन कॉलेजों में शिक्षा प्रदान करता है : अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग. इस विश्वविद्यालय में 650 बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी है, जहां डॉक्टर्स मुफ़्त में मरीजों का उपचार करते हैं. पुलिस ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को पूरे दिन विश्वविद्यालय में निरीक्षण किया और कई लोगों से पूछताछ की.
दिल्ली धमाके में 9 लोगों की मौत
10 नवंबर की शाम दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास विस्फोटकों से लदी एक कार में हुए एक हाई-इंटेंसिटी वाले विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे. पुलवामा का डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी अल-फलाह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर था. ऐसा संदेह है कि विस्फोटकों से लदी हुंदै आई20 वही चला रहा था.
यह विस्फोट विश्वविद्यालय से जुड़े तीन डॉक्टरों (मोहम्मद उमर नबी, मुजम्मिल गनई और निसार-उल-हसन) सहित आठ लोगों को गिरफ्तार करने और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक जब्त करने के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ का खुलासा हुआ, जो कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था !
अल-फ़लाह विश्वविद्यालय की कुलपति ने एक बयान जारी किया
अल-फलाह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. भूपिंदर कौर आनंद ने एक बयान जारी किया। बयान में कहा गया है, “हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम से व्यथित हैं और इसकी निंदा करते हैं। हमें यह भी पता चला है कि हमारे दो डॉक्टरों को जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। विश्वविद्यालय का इन व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं है, सिवाय इसके कि वे विश्वविद्यालय में अपनी आधिकारिक क्षमता में काम कर रहे हैं। हम ऐसे सभी झूठे और अपमानजनक आरोपों की कड़ी निंदा करते हैं और उनका स्पष्ट रूप से खंडन करते हैं। कुछ प्लेटफ़ॉर्म द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, ऐसा कोई भी रसायन या सामग्री विश्वविद्यालय परिसर में इस्तेमाल, संग्रहीत या संभाली नहीं जा रही है। विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं का उपयोग केवल और केवल MBBS छात्रों और अन्य अधिकृत पाठ्यक्रमों की शैक्षणिक और प्रशिक्षण आवश्यकताओं के लिए किया जाता है। विश्वविद्यालय संबंधित जांच अधिकारियों को अपना पूरा सहयोग दे रहा है ताकि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामले में तार्किक, निष्पक्ष और निर्णायक निर्णय पर पहुँच सकें।”
जहां से चार आतंकी निकले, वहां 40% डॉक्टर कश्मीरी: फरीदाबाद के धौज गांव में बनी जिस अलफलाह यूनिवर्सिटी से चार आतंकी डॉक्टर निकले, वहां 40% डॉक्टर कश्मीरी हैं। नाम न छापने की शर्त पर मेडिकल कॉलेज में तैनात एक महिला डॉक्टर ने भास्कर को बताया कि 2021 में लेडी आतंकी डॉ. शाहीन बतौर प्रोफेसर जुड़ी। उसे प्रबंधन ने कॉलेज की 6 सदस्यीय फार्माको विजिलेंस कमेटी में अहम पद दिया। उसने ही 2022 में पुलवामा के आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल गनी, डॉ. उमर नबी, डॉ. सज्जाद अहमद को नौकरी दिलाई। सज्जाद को कॉलेज कमेटी का सदस्य बनवाया। शाहीन और सज्जाद का यूनिवर्सिटी में काफी प्रभाव था।


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