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उज्जैन सहित प्रदेश के अन्य शहरों में विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की भूमि अधिग्रहण का विरोध बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में, आगामी 18 नवंबर से धार्मिक नगरी उज्जैन में किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन में भारतीय किसान संघ (भाकिसं) के बैनर तले धार जिले से भी 500 से अधिक कार्यकर्ता अपने निजी वाहनों से उज्जैन पहुंचकर शामिल होंगे।

किसानों की मुख्य मांगें
लैंड पूलिंग एक्ट को तत्काल वापस लिया जाए।
यूरिया और डीएपी सहित खाद की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
खाद-बीज की कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
धान, गेहूं, मूंग और उड़द का रुका हुआ भुगतान किसानों को तुरंत दिया जाए।
गेहूं 2700 रुपए और धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जाए।
जिले में तीन साल से अधिक समय से पदस्थ कृषि विभाग के अधिकारियों का ट्रांसफर हो और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

किसानों का यह आंदोलन तब तक जारी रखने का संकल्प लिया गया है, जब तक लैंड पूलिंग एक्ट वापस नहीं लिया जाता। किसान संगठनों का कहना है कि यह मुद्दा केवल उज्जैन का नहीं, बल्कि पूरे किसान वर्ग का है, और वे अपनी जमीन बचाने के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।
इस संबंध में रविवार को भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत की एक वर्चुअल बैठक हुई। इसमें संगठन मंत्री महेश चौधरी, कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र पालीवाल और प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आजना ने मार्गदर्शन दिया। बैठक में उज्जैन में किसानों द्वारा किए जाने वाले ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन पर विस्तृत चर्चा की गई।

किसान संघ पदाधिकारियों ने बताया कि यह आंदोलन किसानों की आस्था का केंद्र है। सरकार से मांग की गई है कि सिंहस्थ मेले का आयोजन पूर्व अनुसार खुले में हो और लैंड पूलिंग एक्ट को तत्काल वापस लिया जाए। महेश चौधरी ने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता किसान समाज के लिए हमेशा चिंतनशील रहते हैं और किसानों की भूमि बचाने के लिए भाकिसं का प्रत्येक कार्यकर्ता पूर्ण निष्ठा से कार्य करेगा।

जिला मंत्री पाटीदार ने जानकारी दी कि आंदोलन में मालवा प्रांत के प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में किसान शामिल होंगे। किसानों को अपना झंडा, डंडा, खाने का सामान और मौसम के अनुसार ओढ़ने-बिछाने का सामान साथ लाने को कहा गया है। प्रत्येक ग्राम, तहसील समिति जिले के बैनर के साथ अनिश्चितकाल के लिए धरने में शामिल होगी।
राजेंद्र पालीवाल ने जोर देकर कहा कि अब यह मुद्दा केवल उज्जैन का नहीं, बल्कि पूरी किसान वर्ग का है। प्रदेश अध्यक्ष कमल आंजना ने स्पष्ट किया कि जब तक सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के नाम पर किसानों की जमीन लेना बंद नहीं होता और लैंड पूलिंग एक्ट वापस नहीं लिया जाता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे। जिले से किसान ट्रैक्टर और अपने निजी वाहनों से आंदोलन स्थल पर पहुंचेंगे।


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