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इंडिगो पर एक्शन की तैयारी,उड़ान शेड्यूल में होगी कटौती, दूसरी एयरलाइंस को दिए जाएंगे स्लॉट
नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में इंडिगो करीब 2,200 दैनिक उड़ानें चला रही है, “हम इसे निश्चित रूप से कम करेंगे.”

सरकार ने दी चेतावनी

केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बीते दिन संसद में इंडिगो को चेतावनी देते हुए कहा था कि मामले की जांच शुरू हो गई है। सरकार इसपर ऐसी सख्त कार्रवाई करेगी कि भविष्य में सभी एयरलाइंस के लिए उदाहरण सेट होगा।

नायडू ने देश में नई एयरलाइंस शुरू करने की भी बात कही है। उन्होंने कहा, देश को कम से कम 5 बड़ी एयरलाइंस की जरूरत है और नई एयरलाइंस शुरू करने का ये सबसे सही समय है।

संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम क्या हैं?

  • परिचय: FDTL नियम नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी सुरक्षा नियम हैं, जो निर्धारित करते हैं कि पायलट कितने समय तक ड्यूटी पर रह सकते हैं, वे कितने घंटे उड़ान भर सकते हैं, कितनी रात में लैंडिंग की अनुमति है, और उन्हें न्यूनतम विश्राम कितने समय का लेना अनिवार्य है।
    • ये नियम पायलट की थकान को रोकने, मानवीय त्रुटियों को कम करने और विमानन सुरक्षा बढ़ाने के लिये बनाए गए हैं, तथा ये अंतर्राष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुरूप हैं।
  • नए FDTL नियम:
    • साप्ताहिक आराम बढ़ाया गया: पायलटों को अब लगातार 48 घंटे का आराम लेना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था।
    • रात में लैंडिंग की सीमा तय: पायलट अब केवल 2 रात की लैंडिंग कर सकते हैं, जो पहले 6 थी।
      • लगातार 2 रात्री ड्यूटी से अधिक की अनुमति नहीं है।
    • अनिवार्य रोस्टर समायोजन: एयरलाइनों को नए सीमाओं के अनुसार क्रू रोस्टर को पुनः डिज़ाइन करना होगा।
    • त्रैमासिक थकान रिपोर्टिंग: एयरलाइनों को नियमित रूप से थकान जोखिम रिपोर्टें DGCA को प्रस्तुत करनी होंगी।
  • उद्देश्य: थकान हवाई यात्रा में एक प्रमुख संचालन जोखिम है, विशेष रूप से सुबह जल्दी उड़ानों और रात में लैंडिंग के दौरान।
    • नए FDTL नियम पायलट की सतर्कता बढ़ाने, मानवीय त्रुटियों को कम करने और भारत के विमानन सुरक्षा मानकों को वैश्विक मानदंडों के अनुरूप बनाने का लक्ष्य रखते हैं।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)

  • परिचय: DGCA, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, भारत का सर्वोच्च नागरिक उड्डयन सुरक्षा नियामक संगठन है।
    • यह नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत एक संलग्न कार्यालय के रूप में कार्य करता है और भारत में हवाई परिवहन सेवाओं, हवाई सुरक्षा तथा हवाई उड़ान योग्यता मानकों को अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO)के समन्वय में विनियमित करने के लिये ज़िम्मेदार है।
  • DGCA की भूमिका:
    • विमानन सुरक्षा नियामक: भारत में हवाई सुरक्षा, उड़ान संचालन सुरक्षा और हवाई उड़ान योग्यता मानकों को सुनिश्चित करता है।
    • लाइसेंसिंग प्राधिकरण: पायलट, विमान रखरखाव अभियंता, उड़ान अभियंता और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को लाइसेंस जारी करता है।
    • हवाई परिवहन सेवाओं का विनियमन: भारतीय और विदेशी ऑपरेटरों की अनुसूचित और गैर-अनुसूचित उड़ानों को नियंत्रित करता है।
    • दुर्घटना जाँच और रोकथाम: विमानन दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच करता है और सुरक्षा निवारक उपाय लागू करता है।
    • पर्यावरणीय विनियमन: ICAO अनुबंध 16 के अनुसार विमान की ध्वनि और इंजन उत्सर्जन की निगरानी करता है।
    • कानूनी और नीतिगत समर्थन: विमान नियम, नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CARs) को अपडेट करता है और नए विमानन कानूनों का समर्थन करता है।

भारत के विमानन क्षेत्र की स्थिति क्या है

  • वैश्विक रैंकिंग: अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार है।
    • शहरीकरण, पर्यटन और मध्यम वर्ग के विस्तार के कारण यात्रियों की मांग बढ़ रही है।
  • यात्री यातायात वृद्धि: वर्ष 2040 तक यात्री यातायात छह गुना बढ़कर लगभग 1.1 बिलियन होने की आशा है।
  • आर्थिक योगदान: वर्ष 2025 तक, विमानन  7.7 मिलियन से अधिक नौकरियों (प्रत्यक्ष + अप्रत्यक्ष) का समर्थन करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 1.5% का योगदान देता है।
  • फ्लीट स्ट्रेंथ: इंडियन फ्लीट की हिस्सेदारी कुल वैश्विक बेड़े का लगभग 2.4% है।
    • एयरलाइन विस्तार और नए विमान ऑर्डर के कारण फ्लीट का आकार तीव्रता से बढ़ा है।
  • हवाई अड्डा अवसंरचना विस्तार: परिचालन हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2014 में 74 से बढ़कर वर्ष 2025 में 163 हो गई। वर्ष 2047 तक, भारत का लक्ष्य 350-400 हवाई अड्डे निर्मित करना है।
  • ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों एवं पीपीपी आधारित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ।
  • भारतीय नागरिक उड्डयन विनियमन: 
    • एयर कॉर्पोरेशन एक्ट, 1953: नौ एयरलाइन कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया। 1990 के दशक के मध्य तक इस क्षेत्र में सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइनों का प्रभाव था।
    • ओपन स्काई पॉलिसी (1990-94): निजी एयर टैक्सी ऑपरेटरों को अनुमति दी गई। इंडियन एयरलाइंस (IA) और एयर इंडिया (AI) का एकाधिकार समाप्त किया गया ।
    • भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024: यह औपनिवेशिक युग के विमान अधिनियम, 1934 का स्थान लेता है और भारत के विमानन कानूनों को ICAO मानकों और शिकागो कन्वेंशन के अनुरूप बनाता है।
      • यह विमानन विनिर्माण में मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देता है, सरलीकृत लाइसेंसिंग एवं नियामक प्रक्रियाओं को प्रस्तुत करता है, एक संरचित अपील तंत्र प्रदान करता है, और साथ ही भारत के समग्र विमानन प्रशासन ढाँचे का आधुनिकीकरण करता है।

भारत के विमानन क्षेत्र में प्रमुख चुनौतियाँ 

  • पायलट एवं चालक दल की कमी: हवाई यातायात में तीव्र वृद्धि के कारण प्रशिक्षित पायलटों, केबिन-क्रू और रखरखाव कर्मचारियों की मांग और उपलब्धता के बीच असंतुलन उत्पन्न हो गया है।
    • FDTL जैसे नए सुरक्षा मानदंडों ने मानवशक्ति की आवश्यकताओं को और बढ़ा दिया है, जिसके कारण उड़ानें बार-बार रद्द हो रही हैं, देरी हो रही है और परिचालन संबंधी व्यवधान उत्पन्न हो रहे हैं, क्योंकि एयरलाइनों ने नई स्टाफिंग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पहले से पर्याप्त पायलटों को नियुक्त और प्रशिक्षित नहीं किया था।
  • हवाई अड्डे के बुनियादी ढाँचे में बाधाएँ: दिल्ली, मुंबई और बेंगलूरू जैसे प्रमुख हवाई अड्डे लगभग पूरी क्षमता से संचालित होते हैं, जिसके कारण रनवे पर भीड़भाड़, पार्किंग की कमी और हवाई क्षेत्र में भीड़भाड़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, विशेष रूप से व्यस्त समय के दौरान।
  • उच्च परिचालन लागत: विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) की ऊँची कीमतों, डॉलर में विमान पट्टे की लागत और बढ़ते रखरखाव व्यय के कारण एयरलाइनों को भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है ।
  • आक्रामक क्षमता एवं समय-निर्धारण प्रथाएँ: एयरलाइंस प्रायः पर्याप्त बैकअप-क्रू या अतिरिक्त विमान के बिना महत्वाकांक्षी उड़ान कार्यक्रम की घोषणा करती हैं, जिससे व्यवधान के दौरान बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • यात्री संरक्षण एवं शिकायत निवारण: बड़े पैमाने पर व्यवधानों के दौरान, यात्रियों को खराब संचार, कमज़ोर मुआवज़ा तंत्र और सीमित कानूनी उपायों का सामना करना पड़ता है।
  • विदेशी विमानों एवं आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता: आयातित विमानों, इंजनों और स्पेयर पार्ट्स पर भारी निर्भरता के कारण इस क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और मुद्रा अस्थिरता का सामना करना पड़ता है।
  • विनिमय दर में अस्थिरता: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में गिरावट से एयरलाइनों की लागत बढ़ जाती है, क्योंकि विमान पट्टे और ईंधन आयात जैसे प्रमुख व्यय डॉलर में होते हैं।
  • विमानन सुरक्षा जोखिम: वर्ष 2025 में हाल ही में हुई दुर्घटनाएँ और बढ़ता यातायात सुरक्षा निरीक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर चिंता को उजागर करता है।

भारत के विमानन क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिये क्या उपाय किये जा सकते हैं?

  • स्थिरीकरण के लिये अस्थायी नियामक राहत: DGCA ने इंडिगो को कुछ रात्रिकालीन परिचालनों से एक बार के लिये अस्थायी छूट प्रदान की है । इस अल्पकालिक राहत का उपयोग केवल परिचालन स्थिरीकरण के लिये किया जाना चाहिये, न कि दीर्घकालिक निर्भरता के लिये।
    • FDTL मानदंडों को कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिये, क्योंकि थकान प्रबंधन विमानन सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • परिचालन बफर्स ​​का निर्माण करना: व्यस्त मौसम और तकनीकी विफलताओं के दौरान व्यवधानों से निपटने के लिये स्टैंडबाय पायलट, रिज़र्व केबिन-क्रू और अतिरिक्त विमान बनाए रखें ।
  • यात्री संचार एवं मुआवज़े में सुधार: जनता का विश्वास बहाल करने के लिये वास्तविक समय अपडेट, स्वचालित रिफंड और मुआवज़ेको मज़बूत किया जाना चाहिये।
  • सतत विमानन को प्रोत्साहित करना: सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), ऊर्जा कुशल हवाई अड्डों को बढ़ावा देना, तथा कार्बन कटौती के लिये ICAO’s की अंतर्राष्ट्रीय विमानन के लिए कार्बन ऑफसेटिंग और न्यूनीकरण योजना (CORSIA) के अनुपालन को बढ़ावा देना।
  • हवाई क्षेत्र आधुनिकीकरण: हवाई क्षेत्र के उपयोग को अनुकूलित करने और देरी को कम करने के लिये उन्नत-सतही आंदोलन मार्गदर्शन और नियंत्रण प्रणाली के साथ प्रस्तावित नागरिक हवाई यातायात प्रबंधन प्रणाली को शीघ्रता से लागू करना।

इंडिगो संकट ने भारत के विमानन क्षेत्र में जनशक्ति नियोजन, बुनियादी ढाँचे की तैयारी और यात्री सुरक्षा में गंभीर कमियों को उजागर किया है।

FDTL मानदंड सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, तथा अंतराष्ट्रीय मानदंडों से भी कुछ नीचे है को एयरलाइनों को मुनाफाखोरी छोड़ अपनाना होगा और आम नागरिक को ब्लैकमेल करना बंद करना पड़ेगा ।

 


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