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भारतीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में पाँच या उससे अधिक न्यायाधीशों की पीठ (संविधान पीठ) द्वारा दिए गए कुछ प्रमुख ऐतिहासिक एवं वर्ष-वार निर्णय नीचे दिए गए हैं:
प्रमुख संविधान पीठ (5 या उससे अधिक जज) के निर्णय (वर्ष-वार)
  • वर्ष 1950
      • ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (A.K. Gopalan v. State of Madras): 6 जजों की पीठ ने निवारक नजरबंदी (Preventive Detention) और अनुच्छेद 21 की व्याख्या पर फैसला दिया।

  • वर्ष 1951
      • मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोरैराजन (State of Madras v. Champakam Dorairajan): 5 जजों की पीठ ने शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित आरक्षण को खारिज किया, जिसके बाद प्रथम संविधान संशोधन हुआ।

  • वर्ष 1978
      • मेनका गांधी बनाम भारत संघ (Maneka Gandhi v. Union of India): 5 जजों की पीठ ने अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के दायरे का काफी विस्तार किया और “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” को “उचित और न्यायसंगत” माना।

  • वर्ष 1980
      • मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (Minerva Mills v. Union of India): 5 जजों की पीठ ने 42वें संशोधन के प्रावधानों को खारिज करते हुए ‘संविधान के बुनियादी ढांचे’ (Basic Structure Doctrine) के सिद्धांत को मजबूत किया।

  • वर्ष 1985
      • मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम (Shah Bano Case): 5 जजों की पीठ ने तलाकशुदा मुस्लिम महिला के भरण-पोषण (Maintenance) के अधिकार को मान्यता दी।

  • वर्ष 1986
      • एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (Oleum Gas Leak Case): 5 जजों की पीठ (मुख्य न्यायाधीश पी.एन. भगवती) ने पर्यावरणीय कानून में ‘अत्यधिक दायित्व’ (Absolute Liability) का सिद्धांत तय किया।

  • वर्ष 1992
      • इंद्र साहनी बनाम भारत संघ (Indra Sawhney / Mandal Commission Case): 9 जजों की पीठ ने ओबीसी आरक्षण और 50% की सीमा के साथ ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) का सिद्धांत तय किया।

  • वर्ष 1994
      • एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (S.R. Bommai v. Union of India): 9 जजों की पीठ ने अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के दुरुपयोग पर कड़े संवैधानिक प्रतिबंध लगाए।

  • वर्ष 1997
      • विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (Vishaka v. State of Rajasthan): 5 जजों की पीठ ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए ‘विशाखा गाइडलाइंस’ जारी कीं।

  • वर्ष 2015
      • श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (Shreya Singhal v. Union of India): 5 जजों की पीठ ने आईटी एक्ट की धारा 66A को असंवैधानिक घोषित किया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ थी।

  • वर्ष 2017
      • के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (Justice K.S. Puttaswamy Case): 9 जजों की ऐतिहासिक पीठ ने ‘निजता के अधिकार’ (Right to Privacy) को मौलिक अधिकार माना।
      • शायरा बानो बनाम भारत संघ (Shayara Bano Case): 5 जजों की पीठ ने ‘तीन तलाक’ (Triple Talaq) को असंवैधानिक और अवैध करार दिया। [1]

  • वर्ष 2018
      • नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (Navtej Singh Johar v. Union of India): 5 जजों की पीठ ने धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया।
      • जोसफ शाइन बनाम भारत संघ (Joseph Shine v. Union of India): 5 जजों की पीठ ने आईपीसी की धारा 497 (व्यभिचार/Adultery) को असंवैधानिक घोषित किया। [1]

  • वर्ष 2023
      • सुप्रियो बनाम भारत संघ (Samlaina / Same-Sex Marriage Case): 5 जजों की संविधान पीठ ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इंकार किया।
      • दिल्ली एनसीआर प्रशासनिक सेवाएं मामला (NCTD v. Union of India): 5 जजों की पीठ ने दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार निर्वाचित सरकार को दिया। [1, 2]

  • वर्ष 2025
      • गायत्री बालासामी बनाम आईएसजी नोवासॉफ्ट (Gayatri Balasamy v. ISG Novasoft): 5 जजों की पीठ ने मध्यस्थता पुरस्कार (Arbitral awards) में बदलाव से जुड़े शक्तियों पर फैसला दिया।
      • ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम भारत संघ: 5 जजों की पीठ ने उच्च न्यायिक सेवाओं (HJS) में वरिष्ठता और भर्ती के सिद्धांतों को तय किया।
      • राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर राष्ट्रपति संदर्भ (Presidential Reference): 5 जजों की पीठ ने विधेयकों को मंजूरी देने या रोकने से संबंधित शक्तियों को स्पष्ट किया। [1, 2]

  • वर्ष 2026
    • इंडस्ट्री की परिभाषा पर 9-जजों की पीठ का निर्णय: सुप्रीम कोर्ट ने “इंडस्ट्री” (Industry) शब्द की पुरानी परिभाषा पर पुनर्विचार करते हुए 9 जजों की पीठ के माध्यम से महत्वपूर्ण व्यवस्था दी।
    • पैसिव यूथनेशिया (Common Cause दिशानिर्देशों का सुव्यवस्थितिकरण): 5/पीठ के निर्णयों की तर्ज पर मेडिकल बोर्ड और जीवन रक्षक प्रणाली (CANH) को हटाने संबंधी दिशानिर्देशों को स्पष्ट किया गया।

      भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की 5, 7, 9, 11 और 13 न्यायाधीशों वाली संविधान पीठों (Constitution Benches) ने कितने निर्णय दिए हैं

      रिकार्ड के अनुसार:

      • 13 न्यायाधीशों की संविधान पीठ: अब तक केवल 1 बार गठित हुई, केसवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में।
      • 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ: 1950 से अब तक लगभग 21 बार गठित हुई है।
      • 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ: अनेक बार गठित हुई है, लेकिन उपलब्ध स्रोतों में कुल संख्या का एक निश्चित आधिकारिक आँकड़ा नहीं मिला।
      • 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ: सबसे अधिक गठित होने वाली संविधान पीठ है और अधिकांश संवैधानिक निर्णय इसी शक्ति की पीठों द्वारा दिए गए हैं।
      • 11 न्यायाधीशों की संविधान पीठ: बहुत दुर्लभ रही है और कुछ महत्वपूर्ण मामलों में ही गठित हुई।

      वर्षवार सूची (जैसे 1950, 1951, 1952… से लेकर वर्तमान तक 5/7/9/11/13 न्यायाधीशों वाली संविधान पीठों के सभी निर्णय)

       

       

      You said:

       

      yes

       

       

      Copilot said:

      नीचे भारत के सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख संविधान पीठ (Constitution Bench) के बड़े गठन (5+, 7+, 9+, 11+, 13 न्यायाधीश) के कुछ महत्वपूर्ण निर्णय वर्षवार दिए जा रहे हैं। 5-न्यायाधीश पीठों के निर्णय सैकड़ों हैं, इसलिए यहाँ प्रमुख मामलों का सार दिया गया है।

      वर्ष पीठ की शक्ति प्रमुख मामला
      1951 5 शंकर प्रसाद बनाम भारत संघ
      1952 7 दिल्ली लॉज़ एक्ट केस
      1954 5 चंपकम दोरैराजन केस
      1962 5 केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य
      1965 11 सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
      1967 11 गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
      1973 13 केसवानंद भारती बनाम केरल राज्य (सबसे बड़ी पीठ) [testbook.com], [shankarias…iament.com]
      1976 13 (व्यावहारिक रूप से 13 न्यायाधीशों द्वारा सुना गया) ए.डी.एम. जबलपुर केस
      1978 7 मेनका गांधी बनाम भारत संघ
      1980 5 मिनर्वा मिल्स केस
      1981 7 एस.पी. गुप्ता केस
      1992 9 इंद्रा साहनी (मंडल आयोग) केस
      1993 9 सेकंड जजेज केस
      1994 9 एस.आर. बोम्मई केस
      2002 11 टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन केस
      2016 5 एनजेएसी मामला
      2017 9 पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (गोपनीयता अधिकार)
      2018 5 सबरीमला केस
      2023 5 अनुच्छेद 370 मामला

      उपलब्ध ऐतिहासिक आँकड़े

      • संविधान पीठ कम से कम 5 न्यायाधीशों की होती है। [shankarias…iament.com], [drishtiias.com]
      • 9-न्यायाधीश पीठ 1950 से अब तक लगभग 21 बार गठित हुई है। [scobserver.in]
      • 13-न्यायाधीश पीठ का सबसे प्रसिद्ध और सबसे बड़ा निर्णय केसवानंद भारती (1973) है। [testbook.com], [shankarias…iament.com]
      • 11-न्यायाधीश पीठ बहुत कम मामलों में गठित हुई है, जैसे गोलकनाथ, सज्जन सिंह, टी.एम.ए. पाई। [scobserver.in], [shankarias…iament.com]

      यदि आप 1950 से 2026 तक 9-न्यायाधीश एवं उससे बड़ी सभी संविधान पीठों की पूरी वर्षवार सूची चाहते हैं, तो मैं उसे क्रमबद्ध तालिका के रूप में भी दे सकता हूँ।

       

       

      You said:

       

      yes

       

       

      Copilot said:

      यह 1950 से अब तक की कुछ प्रमुख 9, 11 और 13 न्यायाधीशों वाली संविधान पीठों की वर्षवार सूची है। उपलब्ध स्रोत के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में 1950 से अब तक 21 नौ-न्यायाधीशीय संविधान पीठें बैठ चुकी हैं। [scobserver.in]

      13 न्यायाधीशों की पीठ

      वर्ष मामला
      1973 Kesavananda Bharati v. State of Kerala (मूल संरचना सिद्धांत) [testbook.com], [shankarias…iament.com]

      11 न्यायाधीशों की प्रमुख पीठें

      वर्ष मामला
      1965 Sajjan Singh v. State of Rajasthan
      1967 I.C. Golaknath v. State of Punjab
      2002 T.M.A. Pai Foundation v. State of Karnataka [shankarias…iament.com], [drishtiias.com]

      9 न्यायाधीशों की प्रमुख पीठें

      वर्ष मामला
      1962 Gujarat University Case
      1978 Special Courts Bill Reference
      1992 Indra Sawhney (Mandal Case)
      1993 Supreme Court Advocates-on-Record Association (Second Judges Case)
      1994 S.R. Bommai v. Union of India
      2005 I.R. Coelho v. State of Tamil Nadu
      2016 State of Karnataka v. Dr. Praveen Bhai Thogadia (संदर्भित संवैधानिक प्रश्न)
      2017 K.S. Puttaswamy v. Union of India (Right to Privacy)
      2024 Property Owners Association v. State of Maharashtra (अनुच्छेद 39(b) व्याख्या) [scobserver.in]

      महत्वपूर्ण तथ्य

      • संविधान के अनुच्छेद 145(3) के अनुसार संविधान पीठ में न्यूनतम 5 न्यायाधीश होते हैं। [shankarias…iament.com], [drishtiias.com]
      • 5 न्यायाधीशों वाली पीठों के निर्णय सैकड़ों हैं और इन्हें पूर्ण रूप से वर्षवार सूचीबद्ध करना बहुत विस्तृत कार्य है।
      • 7 न्यायाधीशों वाली पीठों के भी अनेक महत्वपूर्ण निर्णय हैं, जैसे Maneka Gandhi (1978) और S.P. Gupta (1981)।

      यदि आप UPSC/Judiciary की तैयारी कर रहे हैं, तो मैं 1950-2026 तक की सभी 21 नौ-न्यायाधीशीय संविधान पीठों की पूरी सूची, उनके मुख्य मुद्दे और निर्णय का सार भी दे सकता हूँ।

       

       

      You said:

       

      सभी 21 नौ-जज पीठों की पूरी सूची दें

       

       

      सर्वोच्च न्यायालय में 1950 से अब तक 21 नौ-न्यायाधीशीय संविधान पीठें बैठी हैं, लेकिन उस स्रोत में 21 मामलों की पूरी सूची

      स्रोतों के आधार पर प्रमुख 9-जज संविधान पीठों की सूची यह है:

      1. In Re: Kerala Education Bill (1958)
      2. Gujarat University v. Krishna Ranganath Mudholkar (1963)
      3. I.C. Golaknath v. State of Punjab (1967, सुनवाई 11-जज, लेकिन संवैधानिक इतिहास में बड़े बेंच संदर्भ में उल्लेखनीय)
      4. Kesavananda Bharati संदर्भित प्रश्नों के बाद कई 9-जज पीठ निर्णय
      5. Special Courts Bill Reference (1979)
      6. S.P. Sampath Kumar (1987)
      7. Indra Sawhney v. Union of India (1992)
      8. Supreme Court Advocates-on-Record Association (Second Judges Case) (1993)
      9. S.R. Bommai v. Union of India (1994)
      10. M. Nagaraj v. Union of India (2006)
      11. I.R. Coelho v. State of Tamil Nadu (2007)
      12. K.S. Puttaswamy v. Union of India (2017)
      13. Property Owners Association v. State of Maharashtra (2

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