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उज्जैन : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS ) की स्थापना के 100 साल हो गए हैं। अब संघ अपने सांगठनिक ढांचे में बदलाव पर विचार कर रहा है। संघ में इस तरह के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक मार्च 2026 में  संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बदलाव के प्रस्ताव पर फ़ाइनल फैसला लिया गया । ये प्रतिनिधि सभा हरियाणा के समालखा में आयोजित हुई ।

ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव

सांगठनिक ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव है। अभी संघ ने पूरे देश को काम के लिहाज से 11 क्षेत्रों में बांटा है लेकिन इसे 11 से 9 करने का प्रस्ताव है। अभी संघ के प्रांत प्रचारक राज्य की सरकारी परिभाषा के हिसाब से बने प्रांत के आधार पर नहीं होते हैं, ये भी संघ के कामकाज की सुविधा के हिसाब से बनाए गए हैं। लेकिन अब प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव है।

प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव

ये राज्य की इकाई के हिसाब से ही होंगे। जैसे अभी संघ के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों में तो एक ही प्रांत प्रचारक हैं जो एक तरह से पूरे राज्य के ही प्रचारक हैं। लेकिन जो बड़े राज्य हैं उनमें एक राज्य में ही कई प्रांत प्रचारक हैं। जैसे राजस्थान में 3 प्रांत प्रचारक, यूपी में 6 प्रांत प्रचारक हैं। बदलाव के बाद सभी राज्यों में राज्य प्रचारक होंगे और पूरे यूपी में भी एक राज्य प्रचारक। अभी बड़े राज्यों में कामकाज के हिसाब से ज्यादा प्रांत प्रचारक बनाए गए हैं। जब राज्य प्रचारक हो जाएंगे तो साथ ही संभाग प्रचारक का पद भी बनाया जाएगा, ये एक संभाग यानी कमिश्नरी के प्रचारक होंगे। ये विभाग प्रचारक और राज्य प्रचारक के बीच की इकाई होंगे।

संघ के काम प्रभाव का विस्तार हो रहा

संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि संघ के काम का विस्तार हो रहा है और उसी हिसाब से संगठन का ढांचा बनाने का प्रस्ताव है। इससे काम का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज जागरण सहित पंच परिवर्तन का जो काम तय किया है उसे ठीक से संचालित करने के लिए संगठन के ढांचे में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। संघ सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर 2026 तक संघ के शताब्दी वर्ष के ही कई कार्यक्रम है इसलिए अगर बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तब भी ये साल 2027 तक ही लागू हो पाएगा।

संघ परिवार

सैकड़ों संगठन हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित हैं और स्वयं को संघ परिवार के सदस्य बताते हैं। देश के चप्पे चप्पे में अलग अलग उद्देश्यो के लिए सतत् सक्रीय है ।

सभी आनुषंगिक संगठनों संस्थाओं और समूहों के पचास लाख से अधिक प्रचारक /स्वयंसेवक /सदस्यों  द्वारा संघ के लक्ष्यों सिद्धांतो और हितों के अनुकूल समर्पित भाव से कार्य किया जा रहा है ।

अधिकांश मामलों में, इन आनुषंगिक  संगठनों में इनके योजना प्रारम्भ और प्रबन्धन हेतु प्रचारकों (संघ के पूर्णकालिक स्वयंसेवक) को नियुक्त किया जाता है ।

संघ दुनिया के लगभग 80 से अधिक देशों में कार्यरत है।

संघ के लगभग 50 से ज्यादा संगठन राष्ट्रीय ओर अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है ओर लगभग 200 से अधिक संघठन क्षेत्रीय प्रभाव रखते हैं।

जिसमे कुछ प्रमुख संगठन है जो संघ की विचारधारा को आधार मानकर राष्ट्र और सामाज के बीच सक्रिय है। जिनमे कुछ राष्ट्रवादी, सामाजिक, राजनैतिक, युवा वर्गों के बीच में कार्य करने वाले, शिक्षा के क्षेत्र में, सेवा के क्षेत्र में, सुरक्षा के क्षेत्र में, धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में, संतो के बीच में, विदेशो में, अन्य कई क्षेत्रों में संघ परिवार के संघठन अपने सेंकड़ो प्रकल्पों के माध्यम से सतत सक्रिय रहते हैं।

सम्बद्ध संगठनों में  प्रमुख संगठन ये हैं –

  • भारतीय जनता पार्टी (भा० ज० पा०)
  • भारतीय किसान संघ
  • भारतीय मजदूर संघ
  • सेवा भारती
  • राष्ट्र सेविका समिति
  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
  • विश्व हिन्दू परिषद
  • हिन्दू स्वयंसेवक संघ
  • स्वदेशी जागरण मंच
  • सरस्वती शिशु मंदिर
  • विद्या भारती
  • वनवासी कल्याण आश्रम
  • मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
  • बजरंग दल
  • लघु उद्योग भारती
  • भारतीय विचार केन्द्र
  • विश्व संवाद केन्द्र
  • राष्ट्रीय सिख संगत
  • हिन्दू जागरण मंच (हि० जा० म०)
  • विवेकानन्द केन्द्र।
  • दुर्गा वाहिनी: विश्व हिंदू परिषद की महिला युवा शाखा।
  • संस्कार भारती: कला और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित संगठन।
  • भारतीय शिक्षण मंडल: शिक्षा के भारतीयकरण के लिए काम करने वाला संगठन।
  • प्रज्ञा प्रवाह: शिक्षाविदों, विचारकों और बुद्धिजीवियों का एक वैचारिक मंच।
  • अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना (ABISY): भारत के इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्जीवित करने के लिए कार्यरत संगठन।
  • अधिवक्ता परिषद: कानून और न्याय के क्षेत्र में काम करने वाले वकीलों और न्यायाधीशों का संगठन।
  • नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (NMO): स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टरों व मेडिकल छात्रों का संगठन।
  • विज्ञान भारती (VIBHA): स्वदेशी विज्ञान को बढ़ावा देने वाला वैज्ञानिकों का संगठन।
  • क्रीड़ा भारती: देश के युवाओं में खेल भावना और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने वाला संगठन।
  • हिन्दू स्वयंसेवक संघ (HSS):
  • सहकार भारती
  • एकात्म मानववाद के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए दीन दयाल शोध संस्थान (1.7 मी) – 1972, दिल्ली, नानाजी देशमुख (1916-2010) द्वारा स्थापित
  • माई होम इंडिया – पूर्वोत्तर भारत और शेष भारत के बीच राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक अस्मिता को बढ़ावा देने के लिए संगठन। देश भर में पूर्वोत्तर भारत के लोगों को हेल्पलाइन प्रदान करें।
  • भारत विकास परिषद, मानव प्रयास के सभी क्षेत्रों में भारत के विकास और विकास के लिए संगठन (1.8m) – 12.1.1963, डॉ सूरज प्रकाश द्वारा स्थापित
  • विवेकानंद चिकित्सा मिशन, सामाजिक चिकित्सा सेवाएं
  • सबरीमाला अयप्पा सेवा समाज
  • सक्षम, नेत्रहीनों के बीच काम करने वाला एक संगठन
  • नेले (“हिंदू सेवा प्रतिष्ठान” का एक हिस्सा), बेसहारा बच्चों के लिए घर
  • लोक भारती, राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन का मोर्चा
  • सीमा सुरक्षा परिषद, सीमांत चेतना मंच सीमावर्ती जिलों के लोगों के बीच काम करने वाला एक संगठन है
  • पूर्व सैनिक परिषद
  • हिंदू मिलिटरी शिक्षा सोसाइटी
  • संस्कृत भारती
  • विज्ञान भारती
    • विश्व संवाद केंद्र संचार विंग, मीडिया से संबंधित कार्यों के लिए पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसमें आईटी पेशेवरों की एक टीम है
    • हिन्दुस्तान समाचार एक बहुभाषी समाचार एजेंसी है।
    • भारतीय विचार केंद्र, जनरल थिंक टैंक। 1982 पी परमेश्वरन द्वारा स्थापित
    • हिंदू विवेक केंद्र, हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए एक संसाधन केंद्र।
    • विवेकानंद केंद्र, नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के साथ “सार्वजनिक नीति थिंक टैंक” के रूप में अध्ययन के 6 केंद्रों के साथ स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रचार। 1972 एकनाथ रानडे (1914-1982) द्वारा स्थापित
    • इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन, एक गैर-लाभकारी थिंक टैंक
    • भारतीय शिक्षण मण्डल, शैक्षिक सुधारों पर एक थिंक टैंक।
    • इंडिया फाउंडेशन, एक थिंक टैंक
    • ABISY), अखिल भारतीय इतिहास सुधार परियोजना 24.5.1994 दिल्ली, मोरोपंत पिंगले (1919-2003) द्वारा स्थापित
    • श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (एसपीएमआरएफ)
    आयोजक, पत्रिका
  • पांचजन्य (पत्रिका)
  • भारतीय शिक्षक संघ
  • अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत,
  • हिंदू राष्ट्र सेना, आदि अनेकों संघठन सक्षम और प्रभावी प्रकल्पों स्थानीय इकाइयों के माध्यम से कार्यरत है

 

इंदौर की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक में विचार विमर्श कर लिए जायेंगे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परिवर्तन के निर्णय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संगठनात्मक और भौगोलिक संरचना में बदलाव की तैयारी है। प्रांत की जगह संभाग की संरचना लागू करने के साथ विभाग, जिला, मंडल, नगर और बस्तियों की संख्या बढ़ाने की योजना है। सभी प्रांतों में इस पर काम लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारों के विकेंद्रीकरण पर भी काम हो रहा है।

मध्य प्रदेश के इंदौर में दो नवंबर से प्रस्तावित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में इन प्रस्तावों पर सहमति बनेगी। इसके तहत संघ कार्य की दृष्टि से जिलों की संख्या लगभग 924 से बढ़ाकर 1500 से 1600 के बीच करने की योजना है।

मंडलों और बस्तियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। नगरों और विभागों की संख्या भी काफी बढ़ जाएगी। इसके साथ ही दायित्वधारी स्वयंसेवकों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो जाएगी। पूरे देश में अभी इनकी संख्या पांच लाख के लगभग है।

संघ की वर्तमान  रचना इस प्रकार है:

  • केंद्र
  • क्षेत्र
  • प्रान्त
  • विभाग
  • जिला
  • तालुका/तहसील/महकमा
  • नगर
  • खण्ड
  • मण्डल
  • ग्राम
  • बस्ती
  • शाखा

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